बल बुद्धि विद्या ही नहीं इन उपायों को करने से धन भी देते हैं श्री हनुमान
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आज देश और दुनिया भर में श्री हनुमान जी की जयंती मनाई जा रही है. इस दिन श्री हनुमान जी का जन्म हुआ था इसलिए हम इसे श्री हनुमान जन्मोत्सव के रूप में मनाएं तो उत्तम होगा। श्री हनुमान जी के बारे में प्रचलित है की वे बल बुद्धि विद्या के दाता हैं जैसा की श्री हनुमान चालीसा में भी लिखा गया है लेकिन श्री हनुमान जी धन प्रदाता भी हैं.  श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव पर अगर हम कुछ उपाय करें तो अवश्य ही  हैं मनवांछित धनलाभ करते  हैं.

हनुमान जयंती के टोटके विशेष फल प्रदान करते है। हनुमान जयंती का दिन हनुमानजी और मंगल देवता की विशेष पूजा का दिन होता है। यह टोटके हनुमान जयंती से आरंभ कर प्रति मंगलवार को करने से मनोकामनाओं की पूर्ती होती है। व्यक्ति जब तरक्की करता है, तो उसकी तरक्की से जल कर उसके अपने ही उसके शत्रु बन जाते हैं और उसे सहयोग देने के स्थान पर वही उसके मार्ग को अवरूद्ध करने लग जाते हैं। ऎसे शत्रुओं से निपटना अत्यधिक कठिन होता है।

श्री हनुमान जी को प्रसन्न करने के ये हैं उपाय 

-हनुमान जयंती के दिन 11 पीपल के पत्ते लें। उनको गंगाजल से अच्छी तरह धोकर लाल चंदन से हर पत्ते पर 7 बार राम लिखें। इसके बाद हनुमान जी के मन्दिर में चढा आएं तथा वहां प्रसाद बाटें और इस मंत्र का जाप जितना कर सकते हो करें। "जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करो गुरू देव की नांई"  हनुमान जयंती के बाद 7 मंगलवार इस मंत्र का लगातार जप करें। प्रयोग गोपनीय रखें। आश्चर्यजनक धन लाभ होगा।

इन उपायों से भी हनुमान जी देते हैं धनलाभ  

-कच्ची धानी के तेल के दीपक में लौंग डालकर हनुमान जी की आरती करें। संकट दूर होगा और धन भी प्राप्त होगा। 

-अगर धन लाभ की स्थितियां बन रही हो, किन्तु फिर भी लाभ नहीं मिल रहा हो, तो हनुमान जयंती पर गोपी चंदन की नौ डलियां लेकर केले के वृक्ष पर टांग देनी चाहिए। स्मरण रहे यह चंदन पीले धागे से ही बांधना है।

-एक नारियल पर कामिया सिन्दूर, मौली, अक्षत अर्पित कर पूजन करें। फिर हनुमान जी के मन्दिर में चढा आएं। धन लाभ होगा।

- पीपल के वृक्ष की जड में तेल का दीपक जला दें। फिर वापस घर आ जाएं एवं पीछे मुडकर न देखें। धन लाभ होगा।

हनुमान उपासना मंत्र

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम् .सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं

रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि..दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे च जनकात्मजा.

पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनन्दनम् ..

 

 

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