नहीं रहा बॉलीवुड का "दयावान" - विनोद खन्ना
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बॉलीवुड अभिनेता और सांसद विनोद खन्ना का निधन हो गया है. वे 70 साल के थे. मुंबई के सर एच एन रिलायंस फ़ाउंडेशन अस्पताल के अनुसार विनोद खन्ना को ऐडवांस्ड ब्लैडर कार्सिनोमा था और उन्होंने गुरुवार दिन में 11 बजकर 20 मिनट पर अंतिम सांस ली.

पेशावर में 1946 में जन्मे विनोद खन्ना ने 140 से भी ज़्यादा फ़िल्मों में अभिनय किया. 1968 में सुनील दत्त की फिल्म मन का मीत से फिल्मी करियर शुरू करने वाले विनोद खन्ना की फिल्म एक थी रानी ऐसी भी इसी महीने रिलीज़ हुई है.

करियर के शुरुआती दिनों में उन्होंने सहायक अभिनेता और खलनायक के किरदारों में काम किया था.

मेरे अपने, दयावान, कुर्बानी, मेरा गांव मेरा देश, मुकद्दर का सिकंदर, लेकिन, हेराफेरी, अमर अकबर एंथनी, जुर्म, चांदनी, और क्षत्रिय जैसी फिल्मों को उनकी यादगार भूमिकाओं के लिए याद किया जाता है.

ओशो के शिष्य भी बन गए थे विनोद खन्ना 

अपने करियर के शिखर दौर में विनोद खन्ना अचानक अभिनय को विदा कहकर आध्यात्मिक गुरु रजनीश के शिष्य हो गए थे. इसके बाद उनकी वापसी 1987 में सत्यमेव जयते से हुई.

देश के विदेश राज्यमंत्री भी रहे 

1997 में विनोद खन्ना भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए और पंजाब की गुरदासपुर सीट से चार बार लोकसभा सांसद रहे. उन्होंने 1998, 1999, 2004 और 2014 का लोकसभा चुनाव जीता मगर 2009 का चुनाव वो हार गए थे.अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में उन्होंने पर्यटन और संस्कृति मंत्री के तौर पर काम किया. बाद में उन्हें विदेश राज्य मंत्री की जिम्मेदारी भी दी गई थी.

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